bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
awadhi
/
Psalms 25
Psalms 25
awadhi
1
हे यहोवा, मइँ खुद क तोहका समर्पित करत हउँ।
2
मोरे परमेस्सर, मोर सिरिफ तोह पइ बिस्सास बाटइ। मोका अपमानित होइ क अनुमति जिन द्या; मोर दुस्मनन क मोह पइ हँसी उड़ावइ क अनुमति जिन द्या।
3
अइसा मनई, जउन तोहमाँ बिस्सास धरत ह, उ निरास नाहीं होइ। मुला बिस्सासघाती निरास होइहीं अउर, उ पचे कबहुँ भी कछू नाहीं प्राप्त करिहीं।
4
हे यहोवा, मोर मदद करा कि मइँ तोहरी राहन क सीखउँ! तू आपन मार्गन क मोका सिच्छा द्या।
5
आपन सच्ची राह तू मोका देखाँवा अउर ओकर उपदेस मोका द्या। तू मोर परमेस्सर तू मोर उद्धारकर्त्ता अहा। मोका हर दिन तोहार भरोसा अहइ।
6
हे यहोवा, मोह पइ आपन दाया राखा अउर उ ममता क मोह पइ परगट करा, जेका तू हरदम राखत ह।
7
आपन जवानी मँ जउन पाप अउर कुकर्म मइँ किहेउँ, ओनका जिन याद राखा। हे यहोवा आपन निज नाउँ निमित्त, मोका आपन करुणा स सुमिर ल्या।
8
हे यहोवा, सचमुच उत्तिम अहइ, उ पापियन क जिन्नगी क नेक राह देखाँवत ह।
9
उ दीन लोगन क आपन राहन क सीख देत ह। बिना पच्छपात क उ ओनका मारग देखाँवत ह।
10
यहोवा क राहन ओन लोगन बरे छिमा स भरी अउ सच अहइँ, जउन ओकर करार अउर कानून क अनुसरण करत हीं।
11
हे यहोवा, मइँ बहुतेरा पाप किहेउँ ह, मुला तू आपन नाउँ बरे मोर हर पापे क दयालुता स छिमा कइ दिहा।
12
जदि कउनो मनई यहोवा क अनुसरण करइ चाहइ, तउ ओका परमेस्सर जिन्नगी क उत्तिम राह देखाँइ।
13
उ मनई उत्तिम वस्तुअन क सुख भोगी, अउर उ मनई क सन्तानन उ धरती क जेका परमेस्सर वचन दिहे रहा स्थायी रइहीं।
14
यहोवा आपन भक्तन पइ आपन भेद खोलत ह। उ आपन निज भक्तन क आपन करार क सिच्छा देत ह।
15
मोर आँखिन मदद पावइ क यहोवा पइ सदा टिकी रहत हीं। मोका मोरी बिपत्ति स उ सदा छोड़ावत ह।
16
हे यहोवा, मइँ पीड़ित अउ अकेल्ला अहउँ। मोरी कइँती मूड़ अउ मोह पइ दाया देखाँवा।
17
मोरी बिपत्तियन स मोका अजाद करा। मोर समस्या सुलझाने क मदद करा।
18
हे यहोवा, मोका परखा अउर मोरी बिपत्तियन पइ निगाह डावा। मोका जउन पाप मइँ किहे हउँ, ओन सबहिं बरे छिमा करा।
19
लखा मोर केतॅना दुस्मनन अहइँ, अउ लखा उ मोहसे केतॅना नफ़रत करत हीं।
20
हे परमेस्सर, मोर रच्छा करा अउर मोका बचाइ ल्या। मइँ तोहार भरोसा राखत हउँ। तउ मोका निरास जिन करा।
21
हे परमेस्सर, तू सचमुच उत्तिम अहा। मोका तोहार भरोसा अहइ, तउ मोर रच्छा करा।
22
हे परमेस्सर, इस्राएल क लोगन क ओनकर सबहिं दुस्मनन स रच्छा करा।
← Chapter 24
Chapter 26 →