bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
awadhi
/
Psalms 113
Psalms 113
awadhi
1
यहोवा क स्तुति करा, हे यहोवा क सेवकन, ओकर स्तुति करा। यहोवा क नाउँ क बड़कई करा।
2
यहोवा क नाउँ अबहुँ अउर सदा सदा बरे आसीसित होइ।
3
मोर इ कामना अहइ, यहोवा क नाउँ क गुण पूरब स जहाँ सूरज उगत ह, पच्छिउँ तलक उ ठउरे मँ जहाँ सूरज बूड़त ह गावा जाइ।
4
यहोवा सबहिं रास्ट्रन स महान अहइ। ओकर महिमा अकासे तलक उठति ह।
5
यहोवा हमरे परमेस्सर क नाई कउनो भी मनई नाहीं अहइ जउन ऊँचाइ पइ विराजमान अहइ।
6
भले ही उ सबइ बातन क जउन धरती अउर आकासे पइ घटत ह, लखइ बरे उ नीचे झुकिके निगाह डावइ ह।
7
परमेस्सर गरीब मनइयन क धूरि स उठावत ह। उ ओनका क गन्दगी स निकारत ह।
8
परमेस्सर ओनका महत्वपूर्ण बनावत ह। परमेस्सर ओन लोगन क महत्वपूर्ण मुखिया बनावत ह।
9
कउनो मेहरारू बे औलाद होइ सकत ह, किन्तु परमेस्सर ओका बच्चा स आसीसित करी, अउर ओका खुस करी। यहोवा क गुणगान करा।
← Chapter 112
Chapter 114 →