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Psalms 75
Psalms 75
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1
हे परमेस्सर, हम तोहार बड़कई करत अही। हम तोहार बड़कई करत अही काहेकि तोहार मौजूदगी निअरे अहइ। अउर लोग तोहरे ओन अद्भुत करमन क जेनका तू करत अहा, बयान करत हीं।
2
परमेस्सर कहत ह, “मइँ निआउ क समइ चुन लिहेउँ, मइँ निस्पच्छ होइके निआउ करब।
3
धरती अउ धरती क हर वस्तु डगमगाइ सकत ह अउर गिरइ क तइयार होइ सकत ह, किन्तु मइँ ही ओका स्थिर राखत हउँ।
4
“कछू लोग बहोत ही घमण्डी होत हीं। उ पचे सोचत रहत हीं कि उ पचे बहोत मजबूत अउ महत्वपूर्ण बाटेन। मुला मई उनसे कहत हउँ, ‘घमण्डी जिन बना! अइसा बिउहार जिन करा कि तू बहोत मजबूत अउ महत्वपूर्ण अहइ।
5
अइसा जिन दिखावा कि तू बहोत सक्तीसाली अहइ अउर अहंकारी जिन बना।’”
6
इ फुरइ अहइ कि कउनो भी मनई धरती पइ नीच क महान नाहीं बनाइ सकत।
7
परमेस्सर सासक ह। परमेस्सर ऍकर फैसला करत ह कि कउन मनई महान होइ। परमेस्सर ही कउनो मनई क महत्व स भरा पद पइ बइठावत ह। अउर कउनो क महत्वहीन पद पइ उहइ बइठावत ह।
8
परमेस्सर क पिआला मिलावटी मधु स भरा बाटइ। परमेस्सर दण्ड क इ दाखरस क उड़ेरत ह। अउर दुट्ठ जन ओका आखिरी बूँद तलक पिअत हीं।
9
मइँ इ बातन क घोसना करब जउन परमेस्सर सदा बरे करत ह। मइँ इस्राएल क परमेस्सर क महिमा क गुण गाउब।
10
परमेस्सर कहत ह, “मइँ दुट्ठ लोगन क सक्ती क हटाइ देब। किन्तु सबइ नीक लोगन क सम्मान सक्ती स कीन्ह जाइ।”
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