bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
awadhi
/
Psalms 65
Psalms 65
awadhi
1
हे परमेस्सर सिय्योन पर्वत पइ, हम पचे तोहका इ सान्ति पराथना भेंट किहउँ ह अउर आपन प्रतिग्या क पूरा किहेउँ ह।
2
मइँ तोहरे ओन कामन क बखान करत हउँ, जउन तू किहा ह। उ तू ही बाटइ जउन पराथनन क उत्तर दिह्या। एह बरे हर कउनो मनई तोहार लगे मँ आवत हीं।
3
जब हमार पाप हम पइ भारी पड़त हीं, हमसे सहा नाहीं जाइ पावत, तउ तू हमार ओन पापन्क हरिके लइ जात ह।
4
हे परमेस्सर, जेका तू चुन्या ह अउर आपन आँगनन मँ बसइ बरे लिआवा ह उ पचे बहोत असीसित होइहीं। उ पचे तोहार घर, तोहार पवित्तर मन्दिर क बहोत बढ़ियाँ चिजियन स भरि देइहीं।
5
परमेस्सर मोर उद्धारकर्त्ता, तू जउने तरह स लोगन क सम्मान दिहा ह इ बहोत नीक बाटइ। तू अचरज भरा काम करा, एह बरे दूर रास्ट्रन क लोगन अउर दूर क समुद्दरन तोहार लगे सुरच्छा बरे आइहीं।
6
परमेस्सर आपन महासक्ती क प्रयोग किहस अउ पर्वत रच डाएस। ओकर सक्ति हम आपन चारिहुँ कइँती लखत अही।
7
परमेस्सर उफनत भवा सागर सांत किहस। परमेस्सर जगत क सबहिं अनगिनत लोगन क बनाएस।
8
जउन अद्भुत बातन क परमेस्सर करत अहइ, ओनसे धरती क हर मनई डेरात अहइ। परमेस्सर तू ही हर कहूँ सूरज क उगावत अउ डुबावत ह। हर जगह लोग तोहार गुणगान करत हीं।
9
भुइँया क सारी रखवारी तू करत ह। तू ही ऍका सींचत अउ तू ही ऍहसे बहोत सारी वस्तुअन क उपजावत अहा। हे परमेस्सर, नदियन क पानी स तू ही भरत अहा। तू ही फसलन क बढ़त करत अहा।
10
तू जोता भए खेतन पइ बर्खा करत अहा। तू खेतन क जल स लबालब कइ देत ह, अउर धरती क बर्खा स नरम बनावत ह, अउर तू फिन पौधन क बढ़त करत ह।
11
तू नवा बरिस क सुरूआत उत्तिम फसलन स करत ह। तू भरपूर फसलन स गाड़ियन भर देत अहा।
12
बन अउ पर्वत दूब घासे स ढँकि जात हीं।
13
भेड़िन स चरागाहन भर गइन। फसलन स घाटियन भरपूर होत अहइँ। हर कउनो गावत अउ आनन्द मँ ऊँचा पुकारत अहइ।
← Chapter 64
Chapter 66 →