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Psalms 53
Psalms 53
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1
मूरख ही सोचत ह कि परमेस्सर नाहीं होत ह। इ तरह क लोग विनासकारी, भ्रस्ट, कुटिल होत हीं। उ पचे तउ कउनो नीक काम नाहीं करतेन।
2
परमेस्सर अकासे मँ स नीचे सबइ लोगन क लखेस। इ लखत ह कि का हिआँ स कउनो बुद्धिमान मनई ओका हेरत रहत रहा?
3
मुला सबहिं लोग परमेस्सर स भटक गवा अहेन। हर मनई बुरा अहइ। कउनो भी मनई कउनो नीक करम नाहीं करत, एक ठु भी नाहीं।
4
परमेस्सर कहत ह, “निहचय ही उ सबइ दुट्ठ लोग सत्य क जानत हीं। उ सबइ दुट्ठ लोग मोरे मनवइयन क अइसे बरबाद करइ क तइयार अहइँ, जइसे उ सबइ निज खइया क खाइ क तइयार रहत हीं”
5
मुला उ सबइ दुट्ठ लोग ऍतना डेराइ जइहीं, जेतँना उ सबइ दुट्ठ लोग पहिले कबहुँ डेरानेन नाहीं। एह बरे परमेस्सर इस्राएल क ओन दुट्ठ दुस्मन लोगन क तजेस ह। परमेस्सर क मनवइयन ओनका हरइहीं अउर परमेस्सर ओन दुट्ठन क हड्डियन क छितराइ देइ।
6
कउनो एक सिय्योन पर्वत स इस्राएल क बचाइ! जब परमेस्सर आपन लोगन क स्थिति पुन: स्थापित करी, याकूब क लोग खुस होइहीं। हाँ इस्राएल बहोत खुस होइ।
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