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Psalms 41
Psalms 41
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1
जउन दीन क कामयाब होने मँ मदद करत ह उ धन्य अहइ। यहोवा ओनका बचावत ह जब उ पचे विपत्ती मँ होत हीं।
2
यहोवा उ मनई क रच्छा करी अउ ओकर जिन्नगी बचाइ। उ मनई धरती पइ बहोतइ बरदान पाई। परमेस्सर ओकरे दुस्मनन क जरिये ओकर नास नाहीं होइ देइ।
3
जब मनई रोगी होइ अउर बिछउना मँ पड़ा होइ, ओका यहोवा सक्ति देइ। उ मनई बिछउना मँ चाहे रोगी पड़ा होइ, मुला यहोवा ओका चंगा कइ देइ।
4
मइँ कहेउँ, “यहोवा, मोहे पइ दाया करा। मइँ तेरे खिलाफ पाप किहेउँ ह, मुला मोका अउर अच्छा करा।”
5
मोर दुस्मन मोरे बरे अपसब्द कहत अहइँ, उ पचे कहत अहइँ, “इ कब मरी अउर कब बिसराइ दीन्ह जाई?”
6
कछू लोग मोरे लगे मिलइ बरे आवत हीं। उ पचे कउनो लाभदायक बात नाहीं बोलत हीं, उ पचे सिरिफ कछू समाचार मोरे बरे जमा करत हीं। बाद मँ इ ओनका हर जगह फइलावत हीं।
7
मोर दुस्मन छुपे छुपे मोर निन्दा करत रहत हीं। उ पचे मोरे खिलाफ कुचक्र रचत हीं।
8
उ पचे कहा करत हीं, “उ कउनो बुरा करम किहेस ह, इहइ स ओका कउनो बुरा लोग लगा ह। मोका आसा अहइ उ कबहुँ तन्दुरुस्त नाहीं होइ।”
9
मोर परम मित्र मोरे संग खात रहा, ओह पइ मोका भरोसा रहा। मुला अब मोर परम मित्र भी मोरे खिलाफ होइ ग अहइ।
10
तउ हे यहोवा, मोह पइ कृपा करा अउ मोहे पइ कृपालु ह्वा। मोका खड़ा करा कि मइँ बदला लेउँ।
11
हे यहोवा, अगर तू मोरे दुस्मनन क बुरा नाहीं करइ देब्या, तउ मइँ समुझब कि तू मोका अपनाइ लिहा ह।
12
मइँ निर्दोख रहेउँ अउर तू मोर मदद किहा। तू मोका खड़ा किहा अउर मोका तोहार सेवा करइ दिहा।
13
इस्राएल क परमेस्सर, यहोवा क प्राचीन काल स लइके अन्तिम समई तलक धन्न होइ। आमीन, आमीन!
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