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Psalms 39
Psalms 39
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1
मइँ कहेउँ, “जब तलक इ सबइ दुट्ठ मोरे समन्वा रइहीं, तब तलक मइँ आपन कहनी बरे सचेत रहब। मइँ आपन वाणी क पाप स दूर रखब। अउर मइँ आपन मुँह क बंद कइ लेबउँ।”
2
तउ एह बरे मइँ कछू नाहीं कहेउँ। मइँ भला भी नाहीं कहेउँ। मुला मइँ बहोत परेसान भएउँ।
3
मइँ बहोत गुस्सान रहेउँ। इ बारे मँ मइँ जेतना सोचत चला गएउँ, ओॅतना ही मोर किरोध बाढ़त चला गवा। तउ मइँ आपन मुँह तनिकउ नाहीं खोलेउँ।
4
हे यहोवा, मोका बतावा कि मोरे संग का कछू घटित होइवाला अहइ? मोका बतावा, मइँ कब तलक जिअत रहब? मोका जानइ द्या फुरइ मोर जिन्नगी केतनी छोट अहइ।
5
तू मोका जिअइ बरे बहोत कम समइ दिहा ह। तोहार तुलना मँ मोर जिन्नगी बहोत अल्प अहइ। एक मनई क जिन्नगी सिरिफ एक साँस अहइ। कउनो भी सदा नाहीं जिअत।
6
उ जिन्नगी जेका हम लोग जिअत ह, उ झूठी छाया भइ होत ह। जिन्नगी क सारी भाग दौड़ निस्प्रयोजन होत ह। हम पचे तउ बेकार ही चिन्ता पालित ह। धन दौलत वस्तुअन क हम जोरिके धरित ह, मुला हम नाहीं जानित ओनका कउन भोगी।
7
तउ, मोरे यहोवा, मइँ का आसा रखउँ? तू ही बस मोर आसा अहा!
8
हे यहोवा, जउन कुकरम मइँ किहेउँ ह, ओनसे तू ही मोका बचउब्या। तू मोरे संग कउनो क भी कउनो विवेकी न होइवाला जन क संग क नाई बेउहार नाहीं करइ देब्या।
9
मइँ आपन मुँह नाहीं खोलब। मइँ कछू भी नाहीं कहब। यहोवा तू वइसे किह्या जइसे करइ चाही रहा।
10
मुला परमेस्सर, मोका सजा देब तजि देइ। अगर तू मोका सजा देब नाहीं तज्या, तउ तू मोर नास करब्या।
11
हे यहोवा, तू लोगन क ओनकर कुकरमन क सजा देत अहा, अउर इ तरह जिन्नगी क खरी राह लोगन क सिखावत ह। हमार काया पुरान अउ दुबराइ जात ह। अइसे उ ओढ़ना क नाईं जेहमाँ कीरा लाग होइ। हमार जिन्नगी एक ठु नान्ह बादर जइसे लखत बिलाइ जात ह।
12
हे यहोवा, मोर विनती सुना। मोरे ओन सब्दन क सुना जउन मइँ तोहसे गोहराइके कहत हउँ। मोरे आँसुअन क लखा। मइँ बस राहगीर हउँ, तोहका संग लिए इ जिन्नगी क राहे स गुजरत हउँ। इ जिन्नगी क राहे पइ मइँ आपन पुरखन क तरह कछू समइ मात्र पइ टिका भवा हउँ।
13
हे यहोवा, मोका अकेल्ले रहइ द्या। मरइ स अउ चलि जाइ स पहिले मोका फुन स आनन्दित होइ द्या।
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