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Psalms 30
Psalms 30
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1
हे यहोवा, तू मोरी बिपत्तियन स मोर उद्धार किहा ह। तू मोरे दुस्मनन क मोका हरावइ अउर मोर खिल्ली उड़ावइ नाहीं दिहा। तउ मइँ तोहरे बरे आदर परगट करब।
2
हे मोर परमेस्सर यहोवा, मइँ तोहसे पराथना किहेउँ। तू मोका चँगा कइ दिहा।
3
कब्र स तू मोर उद्धार किहा, अउर मोका जिअइ दिहा। मोका मुर्दन क संग मुर्दन क गड़हा मँ पड़े भए नाहीं रहइ पड़ा।
4
परमेस्सर क भगतन, यहोवा क स्तुति करा! ओकरे सुभ नाउँ क प्रसंसा करा।
5
यहोवा कोहाइ गवा, तउ निर्णय भवा “मउत!” मुला उ आपन पिरेम परगट किहस अउर मोका “जिन्नगी” दिहस। मइँ राति क रोवत विलापत सोएउँ। दूसर भिन्सारे मइँ गावत भवा खुस रहेउँ।
6
मइँ अब इ कहि सकत हउँ, अउर मइँ जानत हउँ इ निहचय फुरइ अहइ, “मइँ कबहुँ नाहीं हारब!”
7
हे यहोवा, जब तू मोहे पइ दयालु भया अउ तउ मइँ महसूस किहेउँ कि मइँ अइसा सुरच्छित अहउँ जइसा पहाड़े पइ एक किला। मुला मइँ डर स काँपि गएउँ जब तू मोका अस्वीकार कइ दिहा।
8
हे परमेस्सर, मइँ तोहरी कइँती लउटेउँ अउर बिनती किहेउँ। मइँ आपन पइ दाया देखावइ क विनती किहेउँ।
9
मइँ कहेउँ, “परमेस्सर का इ नीक अहइ कि मइँ मरि जाउँ अउर कब्र क भीतर खाले चला जाऊँ? मरे भए मनई तउ माटी मँ ओलरा रहत हीं, उ पचे तोहरे नेक क स्तुति जउन सदा सदा बनी रहत ह नाहीं करतेन।
10
हे यहोवा, मोर पराथना सुना अउर मोह पइ करुणा करा! हे यहोवा, मोर मदद करा!”
11
मइँ पराथना किहेउँ अउर तू मोर मदद किहा! तू मोरे रोवइ क नाच मँ बदल दिहा मोरे सोक वस्त्र क तू उतारिके बहाइ दिहा, अउर मोका आनन्द मँ सराबोर कइ दिहा।
12
हे यहोवा, मइँ तोर सदा जसगान करब। मइँ अइसा करब जेहसे कबहुँ नीरवता न बियापइ। तोहार प्रसंसा मँ हमेसा कउनो न कउनो गावत रही।
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