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Psalms 11
Psalms 11
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1
मइँ यहोवा पइ भरोसा करत हउँ! फुन तू मोसे काहे कहत ह कि मइँ पराइके कहूँ जाउँ। तू कहत अहा मोसे कि, “पंछी क नाई आपन पहाड़े पइ उड़ि जा!”
2
दुट्ठ जन ओन सिकारी क समान अहइँ। उ पचे अँधियारे मँ लुकात हीं। उ पचे धनुस क डोरी क पाछे हींचत हीं। उ पचे आपन बाणन क साधत हीं अउर उ पचे नीक, नेक मनइयन क हिरदइ मँ सोझइ बाण छोड़त हीं।
3
धर्मी का कइ सकहीं जब समाज क नींव ही तबाह कइ दीन्ह जाइ?
4
यहोवा आपन विसाल पवित्तर मन्दिर मँ विराजा बाटइ। यहोवा सरगे मँ आपन सिंहासने पइ बइठत ह। यहोवा सब कछू लखत ह, जउन भी होनी होत ह। यहोवा क आँखिन लोगन क सज्जनाई व दुर्जनाई क परखइ मँ लाग रहत हीं।
5
यहोवा धर्मी अउ दुट्ठ लोगन क परख करत ह, अउर उ ओन लोगन स घिना करत ह जउन हिंसा स प्रीति धरत हीं।
6
उ गरम कोयलन अउ बरत भइ गन्धक क बरखा क तरह ओन बुरे लोगन पइ गिराई। ओन बुरे लोगन क हींसा मँ बस झुरसत भइ हवा बही।
7
मुला यहोवा, तू धर्मी अहा। तोहका अच्छे जन भावत हीं। अच्छे मनई यहोवा क संग रइहीं अउर ओकरे मुँहना क दर्सन पइहीं।
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