bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
awadhi
/
Psalms 106
Psalms 106
awadhi
1
यहोवा क बड़कई करा। यहोवा क धन्यवाद करा काहेकि उ उत्तिम अहइ। परमेस्सर क पिरेम सदा ही रहत ह।
2
फुरइ यहोवा केतॅना महान अहइ, एकर बखान कउनो मनई कइ नाहीं सकत। परमेस्सर क पूरी बड़कई कउनो नाहीं कइ सकत।
3
जउन लोग परमेस्सर क आदेस क पालन करत हीं, उ पचे धन्न अहइ। उ पचे हमेसा उत्तिम करम करत हीं।
4
यहोवा, जब तू आपन भगतन पइ कृपा करा मोका याद करा। मोर भी उद्धार करइ बरे याद करा।
5
यहोवा, मोका भी ओन भली बातन मँ हींसा बटावइ द्या जेनका तू आपन लोगन बरे करत अहा। तू आपन रास्ट्रन क संग मोका भी खुस होइ द्या। तोह पइ तोहार लोगन क संग मोका भी गर्व करइ द्या।
6
हम पचे वइसेन ही पाप किहेन ह जइसे हमार पुरखन किहेन ह। हम गलत किहेन। हम बुरा काम किहे अही।
7
हे यहोवा, मिस्र मँ हमार पुरखन तोहार अचरज कर्मन स कछू भी नाहीं सीखेन। उ पचे तोहरे पिरेम क अउर तोहार करुणा क याद नाहीं रखेन। हमार पुरखन हुआँ लाल सागर क किनारे तोहरे खिलाफ भएन।
8
मुला परमेस्सर निज नाउँ क कारण ओनका बचाए रहा। उ आपन सक्ति क परगट किहेस।
9
परमेस्सर हुकुम दिहस अउर लाल सागर झुरान होइ गवा। उ ओनका उ गहिर समुद्दर स अइसा निकारि चला जइसे कउनो रेगिस्तान होइ।
10
परमेस्सर हमरे पुरखन क ओनकर दुस्मनन स बचाएस। उ ओनका आपन दुस्मनन स आजाद किहस।
11
अउर फिन ओनकर दुस्मनन क उहइ सागर क बीच ढाँपिके बोर दिहस। ओनकर एक दुस्मन बचिके निकर नाहीं पाएस।
12
तब हमार पुरखन परमेस्सर क वचन पइ बिस्सास किहन। उ पचे ओकर गुण गाएन।
13
मुला हमार पुरखन ओन बातन क हाली बिसरि गएन जउन परमेस्सर किहे रहा। उ पचे परमेस्सर क सम्मति पइ कान नाहीं दिहन।
14
उ पचे दूसर चिजियन क कामना किहेन। रेगिस्तान मँ उ पचे परमेस्सर क परखेन।
15
मुला हमार पुरखन जउन कछू भी माँगेन परमेस्सर ओनका दिहस मुला परमेस्सर ओनका एक महामारी भी दइ दिहस।
16
लोग मूसा स डाह रखइ लागेन अउर हारून स उ पचे डाह रखइ लागेन जउन यहोवा क पवित्तर याजक रहा।
17
एह बरे धरती फट गई अउ दातान क निगल गवा। अउर उ अबिराम क समूह क निगल लिहस।
18
फिन आगी ओन दुट्ठ लोगन क बारि दिहस।
19
ओ लोग होरब क पहाड़े पइ एक ठु सोना क बछवा बनाएन। उ पचे उ मूरति क पूजा करइ लागेन।
20
उ पचे आपन महिमावान परमेस्सर क एक घास खाइवाला बछवा क प्रतिमा स बदल डालेन।
21
हमार पुरखन परमेस्सर क बिसरि गएन जउन ओनका मुक्ति दियाए रहा। उ पचे परमेस्सर क बिसरि गएन जउन मिस्र मँ अचरज भरा करम किहे रहा।
22
परमेस्सर हाम क देस मँ अचरज भरा करम किहे रहा। परमेस्सर लाल सागर क लगे भय विस्मय भरा काम किहे रहा।
23
परमेस्सर ओन लोगन क नस्ट करइ चाहत रहा। मुला परमेस्सर क चुना भवा सेवक मूसा, परमेस्सर क समन्वा ओन लोगन क नास करइ स बचाइ बरे बीच मँ आइ गएन।
24
तब ओन लोग उ अद्भुत देस कनान मँ जाइ स मना कइ दिहन। उ पचे ओकरे वाचा क बिस्सास नाहीं किहेस।
25
आपन तम्बुअन मँ उ पचे सिकाइत करत रहेन। हमार पुरखन परमेस्सर क बात मानइ स नकारेन।
26
तउ परमेस्सर किरिया खाएस कि उ पचे रेगिस्तान मँ मरि जइहीं।
27
परमेस्सर किरिया खाएस कि ओनकर सन्तानन क दूसर लोगन क हरावइ देइ। परमेस्सर कसम खाएस कि उ हमरे पुरखन क देसन मँ छितराइ।
28
बाद मँ परमेस्सर क लोग “बाल-पिऑर” मँ “बाल” क पूजइ करइ सुरू कइ दिहेन। उ पचे उ माँस खाइ लागेन जेका निर्जीव देवतन पइ चढ़ावा ग रहा।
29
यहोवा ओन लोगन क करमन पइ बहोत कोहाइ गवा। अउर उ ओन लोगन क खिलाफ महामारी लिआएन।
30
मुला पीनहास बिनती किहस अउ परमेस्सर उ बियधि क रोकेस
31
परमेस्सर इ काम क ओकरे बरे आवइवालन पीढ़ियन बरे बहोत उत्तिम करम समझेस।
32
लोग मरिबा मँ यहोवा क किरोध भड़काएन, अउर ओकरे कारण मूसा स बुरा काम कराएन।
33
उ सबइ लोग मूसा क बहोत उदास किहन। तउ मूसा बिना ही बिचारे बोल उठा।
34
तउ उ कनान क रास्ट्र क नस्ट नाहीं किहेस, हाँलाकि यहोवा ओनका इ करइ बरे कहे रहा।
35
इस्राएल क लोग दूसर लोगन स हिल मिल गएन, अउर उ पचे भी वइसेन काम करइ लागेन जइसे दूसर लोग करत रहेन।
36
उ सबइ दूसर लोग परमेस्सर क जनन बरे फंदा बन गएन। परमेस्सर क लोग ओन देवन क पूजइ लागेन जेनकर उ पचे दूसर लोग पूजा करत रहेन।
37
हिआँ तलक कि परमेस्सर क जन आपन ही गदेलन क हत्या करइ लागेन। अउर उ पचे ओन गदेलन क ओन दानवन क प्रतिमा पइ अर्पित करइ लागेन।
38
परमेस्सर क लोग निर्दोख गदेलन क हत्या किहन। उ पचे आपन ही गदेलन क मारि डाएन अउर ओनका कनान क देवन क अर्पित किहेन। उ पचे खून स धरती क दूसित किहेन।
39
उ पचे आपन कामन स असुद्ध भएन अउर आपन कार्यन दुआरा अबिस्सासी बन गए रहेन।
40
परमेस्सर आपन ओन लोगन पइ कोहाइ गवा। परमेस्सर ओनसे तंग आइ चुका रहा।
41
तब परमेस्सर आपन ओन लोगन क दूसर जातियन क दइ दिहस। परमेस्सर ओन पइ ओनकर दुस्मनन क हुकूमत करवावइ दिहस।
42
ओनकर दुस्मनन ओन पइ अत्याचार किहन अउ ओनकर जिअब बहोत कठिन कइ दिहन।
43
परमेस्सर आपन लोगन क बहोत बार बचाएस। मुला उ पचे ओनका स मुँह मोड़ लिहन। अउर उ पचे अइसी बातन करइ लागेन जेनका उ पचे करइ चाहत रहेन। एह बरे उ पचे आपन पाप क कारण हराइ दीन्ह गवा रहेन।
44
मुला जब कबहूँ परमेस्सर क जनन पइ विपद पड़ी उ पचे सदा ही मदद पावइ क परमेस्सर क गोहराएन। परमेस्सर हर दाईं ओनकर सबइ पराथना क सुनेस।
45
परमेस्सर सदा आपन करार क याद राखेस। परमेस्सर आपन महा पिरेम स ओनका सदा ही सुख चैन दिहस।
46
परमेस्सर ओन लोगन बरे दूसर कैदियन क समन्वा दयालुता दिखाएस।
47
यहोवा हमार परमेस्सर, हमार रच्छा किहस। परमेस्सर ओन दूसर देसन स हमका ऍकट्ठा कइके लइ आवा, ताकि हम ओकरे पवित्तर नाउँ क गुणगान कइ सकी; तकि हम ओकर बड़कई क गीत गाइ सकी।
48
इस्राएल क परमेस्सर यहोवा क धन्य कहा। परमेस्सर सदा ही जिन्दा रहत आवा ह। उ सदा ही जिन्दा रही। अउर सबइ जन बोलइँ, “आमीन।” यहोवा क गुण गावा।
← Chapter 105
Chapter 107 →