bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
awadhi
/
Isaiah 48
Isaiah 48
awadhi
1
यहोवा कहत ह, “याकूब क परिवार, तू उहइ जाति अहइ जेका ‘इस्राएल’ कहा जात ही, मोर बात सुना! तू पचे यहूदा क घराने स जउन बचन देइ बरे यहोवा क नाउँ लेत अहा, तू पचे इस्राएल क परमेस्सर क बारे मँ बोलत अहा, किन्तु सच्चाई अउर निस्ठावानी स नाहीं।
2
“तू लोग आपन क पवित्तर नगरी क नागरिक कहत अहा। तू पचे इस्राएल क परमेस्सर क भरोसे रहत अहा। ओकर नाउँ सर्वसक्तीमान यहोवा अहइ।
3
“मइँ तू पचन्क बहोत पहिले ही पहिले क ओन घटना क बारे मँ ओका घटइ स पहिले ही बताइ दिहे रहा, तू पचन्क ओन घटना क बारे मँ बताइ दिहे रहा कि इ होइ सकत ह। मइँ अचानक ओन बातन घटाइ दिहेउँ! इ सबइ बातन वइसा ही भवा जइसा मइँ बताए रहा।
4
मइँ तोहका इ सबइ बातन क पहिले ही बताए दिहे रहेउँ काहेकि मोका मालूम रहा कि तू पचे बहोत जिद्दी अहा। मइँ जउन कछू भी बताए रहेउँ ओहे पइ बिस्सास करइ स तू पचे इन्कार किहा, तू पचे बहोत जिद्दी रह्या, जइसे लोहा क छड़ नाहीं निहुरत ह। इ बात अइसी रही जइसे तोहार मूँड़ काँसा क बना भवा होइ।
5
एह बरे मइँ तू पचन्क पहिले ही ओन घटना क बारे मँ बताइ दिहे रहेउँ जउन घटी सकत ह। अइसा एह बरे किहे रहेउँ ताकि तू नाहीं कहि सकइ कि ‘इ सबइ काम हमार देवतन किहेन।’ तू इ नाहीं कहि सकत्या कि ‘हमार मूर्तियन, हमार देवतन,’ इ सबइ बातन घटाइ क आदेस दिहे रहेन।”
6
“तू ओन सबहिं बातन क जउन होइ चुकी अहइँ, लख्या अउर सुन्या ह। एह बरे तोहका इ सबइ खबरियन दूसरन क बतावइ चाही। अब मइँ तोहका नई बातन बतावइ सुरू करत हउँ। जेनका तू अबहिं नाहीं जानत अहा।
7
इ सबइ उ सबइ बातन नाहीं अहइँ जउन पहिले घटि चुकी अहइँ। इ सबइ बातन अइसी अहइँ जउन अब सुरू होत अहइँ, आजु स पहिले तू इ सबइ बातन नाहीं सुन्या। तउ तू नाहीं कहि सकत्या, ‘हम तउ एहसे पहिले ही जानित ह।’
8
किन्तु तब पर भी, तू कबहुँ ओह पइ कान नाहीं दिहा जउन मइँ कहेस। तू मोह स कछू नाहीं सीख्या! तू कछू नाहीं सुन्या जउन मइँ कह्या। किन्तु मइँ तोहका ओन बातन क बारे मँ बताएउँ काहेकि मइँ जानत नाहीं रहेउँ कि तू मोरे विरोध मँ होब्या। तू तउ विद्रोही रह्या जब स तू पइदा भवा।
9
“किन्तु मइँ धीरज धरब। अइसा मइँ अपने बरे करब। मोका किरोध नाहीं आवा एकरे बरे लोग मोर जस गइहीं। मइँ आपन किरोध पइ काबू करब कि तोहार नास न करउँ। तू मोर बाट जोहत भए मोर गुण गउब्या।
10
“लखा, मइँ तोहका सुद्ध करब। चाँदी क सुद्ध करइ बरे लोग ओका आग मँ डावत हीं। किन्तु मइँ तोहका विपत्ति क भट्ठी मँ डाइके सुद्ध करब।
11
इ मइँ खुद अपने बरे करब। तू मोरे संग अइसे नाहीं बरतब्या, जइसे मोर महत्व न होइ। कउनो मिथ्या देवता क मइँ आपन तारीफ नाहीं लेइ देब।
12
“याकूब, तू मोर सुना। हे इस्राएल क लोगो, मइँ तू पचन्क आपन लोग बनवइ क बुलाएउ ह। तू एह बरे मोर सुना। मइँ परमेस्सर हउँ, मइँ ही सुरूआत हउँ अउर मइँ ही अन्त हउँ।
13
मइँ खुद आपन हाथन स धरती क रचना किहेउँ। मोरे दाहिन हाथे अकास क बनाएस। जदि मइँ ओनका गोहराउबउँ तउ दुइनउँ साथ-साथ मोरे समन्वा अइहीं।
14
“एह बरे तू सबहिं जउन आपुस मँ एकट्ठा भए अहा मोर बात सुना। का कउनो लबार देवता तोहसे अइसा कहेस ह कि आगे चलिके अइसी बातन घटिहीं? नाहीं।” यहोवा इस्राएल स जेका, उ चुनेस ह, पिरेम करत ह उ जइसा चाही वइसा ही बाबुल अउर कसदियन क साथ करी।
15
“यहोवा कहत ह कि “मइँ तोहसे कहे रहेउँ। मइँ ओका बोलाउब। मइँ ओका लिआउब अउर ओका सफल बनाउब।
16
आवा अउर मोर सुना, मइँ सुरू से ही एकर बारे मँ साफ-साफ बोलेस ह। मइँ उ समय हुवाँ पइ मोजूद रहा जब बाबुल क नींव पड़ी रहेन।” तउ नबी कहेस, “अब मोर सुआमी यहोवा मोका आपन आतिमा क संग एन बातन क तू पचन्क बतावइ बरे पठएस ह।”
17
यहोवा जउन मुक्तिदाता अहइ अउर इस्राएल क पवित्तर अहइ, कहत ह, “मइँ तोहार यहोवा परमेस्सर अहउँ। मइँ तोहका सिखावत हउँ कि का हितकर अहइ। मइँ तोहका राहे पइ लिये चलत हउँ जइसे तोहका चलइ चाही।
18
अगर तू मानत अहा तउ तोहका ओतनी सान्ति मिल जात जेतनी नदी भरिके बहत ह। तोह पइ उत्तिम चिजियन अइसी छाइ जात जइसे समुद्र क तरंग होइँ।
19
जदि तू मानत्या तउ तोर सन्तानन बहोत बहोत होतिन, तोहार सन्तानन वइसे अनगिनत होइ जातिन जइसे रेत क असंख्य कण होत हीं। जदि तू मोर मानत्या तउ तउ तू नस्ट नाहीं होत्य। तू भी मोर संग बना होत्य।”
20
हे मोरे लोगो, तू पचे बाबुल क तजि द्या। हे मोर लोगो, तू पचे कसदियन स पराइ जा। खुसी मँ भरिके तू पचे लोगन स इ खबरिया क कहा। धरती पइ दूर-दूर इ खबर क फइलावा। तू पचे लोगन क बताइ द्या, “यहोवा आपन दास याकूब क उवारि लिहेस ह।
21
यहोवा आपन लोगन क रेगिस्ताने मँ राह देखाएस, अउर उ सबइ लोग कबहुँ पियासे नाहीं रहेन। काहेकि उ आपन लोगन बरे चटान फोड़िके पानी बहाइ दिहस।”
22
किन्तु परमेस्सर कहत ह, “दुस्टन क सान्ति नाहीं अहइ।”
← Chapter 47
Chapter 49 →