bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
awadhi
/
Isaiah 16
Isaiah 16
awadhi
1
सेला क नगर स मेमनन यहूदा क नवा राजा बरे नज़राना पठावा; तू पचन्क रेगिस्तान स होत भए सिय्योन क बिटिया क पठवा।
2
मोआब क मेहररूअन उ बे सहारे नान्ह चिरइयन क जइसा अहइँ जउन आपन घोंसला स धरती पइ गिर गवा ह। उ पचे अर्नीन नदी क पार करइ बरे इधर-उधर दउड़त अहइ।
3
उ सबइ विन्ती करत अहइँ, “हमार मदद करा! बतावा हम का करी! तू हमका मुसीबत स अइसा बचावा जइसा दोपहर क धूप स एक आंधर छाया हमका बचावत ह। हम सत्रुअन स भागत अही। तू हमका छुपाइ ल्या। हम का तू सत्रुअन क हाथन मँ पड़इ न द्या।”
4
ओन मोआब बासियन क आपन घर तजइ क मजबूर कीन्ह गवा रहा। एह बरे तू ओनका आपन धरती पइ रहइ द्या। तू ओनके सत्रुअन क छुपाइ ल्या। इ लूट रुक जाइ। सत्रु हार जइहीं अउर अइसे मनसेधू दूसर क नोस्कान करत हीं, इ धरती स उखड़िहीं।
5
फुन एक ठु नवा राजा आइ। इ राजा दाउद क घराने स होइ। उ सच्चाई स पूर्ण, करूणावाला अउ दयालु होइ। इ राजा निआव कर्ता अउ निस्पच्छ होइ। उ खरे अउ नीक काम करी।
6
हम सुना ह कि मोआब क लोग बहोत अभिमानी अउ घमण्डी अहइँ। इ सबइ लोग हिंसक अहइँ अउ बड़ा बोले भी। एनकर बड़ा बोल फुरइ नाहीं अहइ।
7
समूचा मोआब देस आपन अभिमान क कारण कस्ट उठाई। मोआब क सारे लोग विलाप करिहीं। उ सबइ लोग बहोत दुःखी रइहीं। उ पचे अइसी वस्तुअन क इच्छा करिहीं जइसी ओनके लगे पहिले हुवा करत रहीं। उ पचे कीरहरासत मँ बने भए अंजीर क पूड़न क इच्छा करिहीं।
8
उ सबइ लोग बहोत दुःखी रहा करिहीं काहेकि हेसबोन क खेत अउर सिबमा क अंगूर क बेलन मँ अंगूर नाहीं लगाइ पावत अहइँ। बाहेर क सासकन अंगूर क बेलन क काट फेकेन ह। याजेर क नगरी स लइके रेगिस्ताने मँ दूर दूर तलक सत्रु क फउजन फइल गइ अहइँ। उ पचे सागर क किनारे तलक जाइ पहोंची अहइँ।
9
“मइँ ओन लोगन क साथ बिलाप करब जउन याजेर अउ सिबमा क निवासी अहइँ काहेकि अंगूर नस्ट कीन्ह गएन। मइँ हेसबोन अउ एलाले क लोगन क साथ सोक करब काहेकि हुवाँ फसल नाहीं होइ। हुवाँ गर्मी क कउनो फल नाहीं होइ। हुवाँ पइ आनन्द क ठहाके भी नाहीं होइहीं।
10
अंगूरे क बगिया मँ आनन्द नाहीं होइ अउर न ही हुवाँ गीत गावा जइहीं। मइँ कटनी क समय क सारी खुसी खतम कइ देब। दाखरस बनवइ बरे अंगूर तउ तइयार अहइँ, किन्तु उ सबइ बर्बाद होइ जइहीं।
11
एह बरे मइँ मोआब बरे बहोत दुःखी हउँ। मइँ कीरहरैम बरे बहोत दुःखी हउँ। मइँ ओन नगरन बरे बहोत जियादा दुःखी हउँ।
12
मोआब क निवासी आपन ऊँचे पूजा क ठउरन पइ जइहीं। उ सबइ लोग पराथना करइ क जतन करिहीं। किन्तु उ सबइ ओन सबहिं बातन क लखिहीं। जउन कछू घटि चुकी अहइ, अउर उ पचे पराथना करइ क दुर्बल होइ जइहीं।”
13
यहोवा मोआब क बारे मँ पहिले अनेक दाई इ सबइ बातन कहे रहा।
14
अउर अब यहोवा कहत ह, “तीन बरिस मँ (उ रीति स जइसे किराये क मजदूर समय गनत ह) उ पचे सबहिं मनई अउर ओनकर उ सबइ वस्तुअन जेन पइ ओनका गर्व रहा, नस्ट होइ जइहीं। हुवाँ बहोत थो़डे स लोग बचिहीं, बहोत स नाहीं।”
← Chapter 15
Chapter 17 →